नया साल, नई शुरुआत, प्रकृति की रक्षा के लिए समर्पण वही पुराना

नया साल,नई शुरुवात,नया समर्पण

नया साल 2020 का पहला रविवार पुकार फाउंडेशन के सदस्यों ने जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान में महिंद्रा फ़ाइनेंस  के सहयोग से लगाए गए  मियावाकी जंगल को पानी पिलाकर एवं रखरखाव कर समर्पित किया | अत्यधिक ठंड पड़ने के बावजूद टीम के सदस्य अल सुबह पौधों के रखरखाव के लिए पहुच गए | इससे साफ दिखा के सिर्फ साल बदला है, टीम का प्रकृति के लिए समर्पण नहीं |

Pukaar Foundation NGO for nature
नए साल का पहला रविवार प्रकृति के साथ

नया साल,नई शुरुवात,नया समर्पण

नया साल 2020 का पहला रविवारपुकार फाउंडेशन के सदस्यों ने जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान में महिंद्रा फ़ाइनेंस  के सहयोग से लगाए गए  मियावाकी जंगल को पानी पिलाकर एवं रखरखाव कर समर्पित किया | अत्यधिक ठंड पड़ने के बावजूद टीम के सदस्य अल सुबह पौधों के रखरखाव के लिए पहुच गए | इससे साफ दिखा के सिर्फ साल बदला है, टीम का प्रकृति के लिए समर्पण नहीं |

उदयपुर टीम ने पूरे किए 279 वहीं बांसवाड़ा ने पूरे किए 100 रविवार

Pukaar banswara team on 100th Sunday
बांसवाड़ा टीम के सदस्य 100 रविवार पूर्ण करने पर

संस्था के सदस्यों ने प्रत्येक रविवार की तरह इस रविवार भी प्रकृति की सेवा के लिए योगदान दिया। संस्थापक भुवनेश ने बताया कि इस रविवार पुकार उदयपुर टीम ने अपने 279वाँ रविवार पूर्ण किया | इस उपलब्धि पर टीम के सदस्यों ने हर्ष प्रकट किया |साथ ही बताया की टीम लगातार  कार्य करते हुए अपना 300वां रविवार जल्द ही पूर्ण करेगी | साथ ही पुकार की बांसवाड़ा टीम को सदस्यों ने बधाई दी जिन्होंने अपना 100वां रविवार 29 दिसम्बर 2019 को पूर्ण किया |

मियावाकी जंगल में आने लगे हैं कई दुर्लभ सूक्ष्म जीव

biodiversity growing at Forest
पुकार के जंगल में बढ़ती जैव विविधता

मियावाकी जंगल के बारे मे बताते हुए उन्होने कहा कि जंगल के लगभग सभी पौधे अच्छी गति से बढ़ रहे हैं | साथ ही जंगल में रखरखाव कार्य के दौरान कई सारे दुर्लभ सूक्ष्म जीव देखने को मिल रहे हैं |इन सूक्ष्म जीवों का जंगल में मिलना जैव विविधता के लिए शुभ संकेत है |


48 लोकल प्रजातियों  के 2000 पौधे लगे हैं मियावाकी जंगल में

पुकार की सदस्य तरुणा ने बताया की इस जंगल में अरावली की 48 लोकल प्रजातियों के 2000 पौधे लगाए गए हैं | इन प्रजातियों में से कई प्रजातियाँ एसी है जो अब मुश्किल से मिलती हैं | उन्होने बताया की जंगल में एसी प्रजातियों को लगाकर उन्हे विलुप्त होने से बचाया जा सकता है | इन प्रजातियों में हरड़,हवन,चिरमी ,गुगगल, गदा पलाश आदि प्रजातियाँ शामिल हैं |

जानिए लोकल व पैतृक प्रजाति के पौधे क्यों आवश्यक हैं 

इस रविवार खंडेलवाल, शक्ति सिंह, तरुणा राणावत,अब्दुल मुबीन ,जुबेदा, प्रतीक सेन,दिव्यरज सिंह झाला, आशीष बृजवासी आदि उपस्थित रहे।

 

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