क्यों आवश्यक हैं पैतृक व लोकल प्रजाति के पौधे, बेहतर पर्यावरण के लिए ?

 पैतृक व लोकल प्रजाति के पौधे क्या होते हैं ?

पैतृक व लोकल प्रजाति पौधे वह होते है जो मनुष्य द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया बल्कि स्वाभाविक रूप से पैदा होता है। पैतृक पेड़ हमारे वन्यजीवों के लिए भोजन और आश्रय प्रदान करते है |ये पौधे जानवरों और मनुष्यों दोनों के लिए ऑक्सीजन का निर्माण करने के लिए एकदम सही हैं। पूर्व में जंगलों में देसी प्रजातियों के पौधे बहुतायत में उगते थे| जो परिस्थितिकी तंत्र के लिए अति आवश्यक होते थे | परंतु अब वे धीरे धीरे विलुप्त हो रहें हैं |पैतृक प्रजातियों के पौधों का रोपण करना भी बहुत आसान होता है |ये पौधे पहले से ही आपके आस पास की जलवायु तथा मिट्टी के अनुकूल होते हैं |इन्हें किसी भी प्रकार के रसायनिक उर्वरक (खाद) की आवश्यकता नहीं होती है |एक बार जब पौधे ज़मीन में ठीक से स्थापित हो जाते है उनकी पानी की मांग धीरे धीरे कम हो जाती है |

 

अरावली पर्वतमाला का पैतृक व लोकल प्रजाति- खेजड़ी वृक्ष
Aravali’s native plant khejadi

 

 

बढ़ रहा है विदेशी प्रजातियों का प्रचलन

Non native Babool tree
विदेशी प्रजाति का पेड़ बबूल

दुर्भाग्य से आमजन द्वारा वर्तमान समय में लोकल प्रजाति के पौधे न लगाकर विदेशी प्रजाति के पौधे लगाए जा रहे हैं | जिनका जैव विविधता को बढ़ाने में कोई योगदान नहीं है | ये विदेशी पौधे खाद्य श्रंखला को विचलित करते हैं| खाद्य श्रंखला प्रभावित होने से मनुष्यों के साथ साथ जीवों एवं पक्षियों को भी हानी होती है | कई विदेशी प्रजातियों के पौधों से मृदा के साथ साथ वातावरण को भी हानि होती है | छोटे जीव जन्तु और कीट अपने भोजन के लिए एक दूसरे पर आश्रित होते हैं | परंतु इन प्रजातियों के बढ्ने के कारण कीटों को उपयुक्त वातावरण नहीं मिल रहा है|जिससे कुछ प्रजातियाँ धीरे-धीरे अब खत्म होती जा रही हैं |

पैतृक व लोकल प्रजाति के पौधों से लाभ

पैतृक व लोकल प्रजाति के पौधे हर तरह से लाभप्रद होते हैं | जब पर्यावरण संरक्षण आपकी चिंता का प्रमुख विषय हो, तब ऐसी प्रजतियों के पौधों का रोपण अतिआवश्यक हो जाता है | जानवरों,पक्षियों और सूक्ष्म जीवों की कई प्रजातियाँ विलुप्ति की दर पर खड़ी हैं |उनका यह हाल होने का प्रमुख कारण है जंगलों में पैतृक प्रजातियों का धीरे धीरे कम होना | पारिस्थिकी तंत्र को विकसित करने में जीव जंतुओं तथा मनुष्यों के साथ पैतृक प्रजातियों के पौधे अहम भूमिका निभाते हैं | कई प्रकार के कीट और सूक्ष्म जीव अपने भोजन के लिए इन्हीं प्रकार के पौधों पर निर्भर रहते हैं |इनमें से कई प्रकार के पौधों की प्रजातियों का आयुर्वेद की दृष्टि से भी बड़ा महत्व है | इन पौधों के रोपण से मृदा अपरदन कम होता है जिससे प्रकार की प्राकर्तिक आपदाओं से सुरक्षा के लिए आवश्यक है |

अरावली पर्वतमाला के गुग्गल, बिसतेन्दु , पिलखन , अर्जुन, महुवा, बहेड़ा , धावड़ा, धोंक आदि  और भी कई ऐसी लोकल प्रजातियाँ हैं जो आयुर्वेद के दृष्टि से बड़ी उपयोगी हैं | पर जागरूकता के अभाव में अब धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं |

पढे- ‘पैतृक व लोकल प्रजाति के पौधो का लगाया जंगल’

क्यों बढ़ावा देना चाहिए लोकल प्रजाति के पौधों को ?

bee sitting on a native plant
पैतृक पौधों की आवश्यकता

यह धरती हम मनुष्यों के साथ-साथ तमाम जीव-जंतुओं एवं सूक्ष्म जीवों का घर है | सभी जीव-जन्तु अपने जीवनयापन के लिए एक दूसरे पर निर्भर हैं | हम मनुष्य अपने आप को जीवित रखने के लिए कई उपाय कर सकते हैं |परन्तु ये जीव जन्तु और पक्षी इन्हें अपना भोजन बनाने तथा जीवित रहने के लिए निश्चित साधन की आवश्यकता होती है |जो इन सभी को सिर्फ पैतृक प्रजातियों के पौधों से मिलते हैं | इन सूक्ष्म जीवों के मृदा में निरंतर रहने से उसकी उर्वरक क्षमता बनी रहती है |

जंगलों में रहते हुए भी उचित वातावरण न मिलने के कारण कुछ जन्तु अब विलुप्त हो रहे हैं | इसका प्रमुख कारण जंगलों में विदेशी प्रजातियों के पौधों का रोपण है | जिससे वहाँ की जैव विविधता धीरे-धीरे घट रही है |इसलिए हम सभी को मिलकर अब इन विदेशी प्रजातियों को छोड़कर पैतृक प्रजातियों को लगाना होगा | जिससे हमें तथा सभी अन्य जीवों को उचित वातावरण मिले तथा जैव विविधता में बढ़ावा हो |

इसी प्रकार की देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण पिछले कई वर्षों से लगातार कर रही है  पुकार फ़ाउंडेशन के युवाओ कि टीम | पौधारोपण के बाद 2 साल तक उनके रखरखाव कि ज़िम्मेदारी भी संस्था के सदस्य निभाते हैं |

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Aashish Brijwasi

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