क्या विश्व-भर में लॉकडाउन हर साल हो? जानिए प्रभाव

विश्व-भर में लॉकडाउन हर साल हो ?

विश्वभर में अब यह सवाल उठने लगा है। वर्तमान लॉकडाउन के अवसर पर सभी अपनी अच्छी-बुरी राय प्रकट कर रहे हैं, वहीं इस लॉकडाउन की अवधि बढ़ने से विश्व-भर में यदि कहीं सकारात्मक बदलाव आए हैं तो वह है “हमारा पर्यावरण” ।

अपने आस-पास के माहौल पर यदि गौर किया जाए तो जो सड़कें कभी गाड़ियों से भरी रहती थी, आज सुनसान हैं। जिन फैक्ट्रियों से लगातार धुआँ निकलता रहता था आज वह बन्द हैं , बिल्डिंग बनाने के लिए जिन वनों को लगातार काटा जा रहा था अब वे रुक गए हैं। ऐसे कई कारणों से आप अपने पर्यावरण में यह बदलाव देख पा रहे हैं । यही बदलाव विश्व-भर में भी देखे गए हैं।

विश्व-भर में देखे गए प्रभाव –

1. वायु प्रदूषण में अचानक हुई गिरावट –

Lockdown effect on air pollution
वायु प्रदूषण पर लॉकडाउन के प्रभाव – लॉकडाउन से राजधानी दिल्ली का इंडिया गेट (फोटो- इंटरनेट)

लॉकडाउन के चलते विश्व-भर के वायु प्रदूषण में आकस्मिक गिरावट दर्ज की गई है। विश्वव्यापी बन्द के जो सकारात्मक प्रभाव हुए हैं यह उनमे सबसे महत्वपूर्ण है। वायु प्रदूषण के इस प्रकार अचानक कम होने का प्रमुख कारण सभी प्रकार के उद्योगों और यातायात का बन्द होना है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार प्रतिवर्ष विश्व में 3 मिलियन लोग वायु प्रदूषण के कारण अपनी जान गँवा देते हैं, तो कई मायनों में यह बदलाव मनुष्यों के लिए लाभदायक है । वर्तमान पीढ़ी द्वारा पर्यावरण में इस प्रकार का बदलाव संभवतः पहली बार ही देखा गया होगा।

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2. जल का फिर से स्वच्छ होना –

Lockdown effect on water pollution
लॉकडाउन के चलते साफ हुई गंगा नदी(फोटो- इंटरनेट)

ऐसे ही सकारात्मक प्रभावों कि यदि बात करें तो जल का स्वतः ही साफ होना भी एक चमत्कार से कम नहीं है। सरकार और मानव मिलकर जिस जल को वर्षों से स्वच्छ नहीं कर पाए। उसे इस लॉकडाउन ने मात्र 1 महीने में साफ कर दिया। विश्व-भर में यातायात पूर्णतः बन्द होने के कारण किसी भी तरह का पर्यटन संभव नहीं है । साथ ही सभी उद्योग और व्यवसाय भी बन्द हैं, जिससे नदियों और झीलों में किसी प्रकार का कोई कचरा नहीं हो रहा है और इसीलिए ये स्वच्छ जल, जलीय जीव जंतुओं के लिए एक वरदान साबित हो रहा है।

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भारत में इसकी बात करें तो हरिद्वार व कई अन्य स्थानों पर घाटों के बन्द होने से वहां का पानी साफ नजर आ रहा है, जहां मछलियाँ एवम् अन्य प्रकार के जीव भी देखे जा रहे हैं । उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UEPPCB) के अनुसार अप्रैल माह में “हर की पौढ़ी” में फेकल कोलीफॉर्म (मानव उत्सर्जन) में 34% तक की तथा जैव रासायनिक ऑक्सीजन की मांग में 20% की कमी आई है। इन्हीं कारणों से गंगा नदी का जल भी अब स्वच्छ नज़र आ रहा है।

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3. ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी –

Green house gas
ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन(फ़ोटो-इंटरनेट)

जैसे ही विश्व-भर के सभी उद्योग और व्यवसायों को बन्द किया गया उसके प्रभाव हर जगह देखे गए। प्रदूषण कम हुआ,जल स्वच्छ हुआ और साथ ही कम हुआ ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन।

इस बन्द से कच्चे तेल की खपत भी कम हुई है । सभी प्रकार के कार्य और यातायात पूर्णतः बन्द होने से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में काफी कमी आई है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक इस वर्ष ग्रीन हाउस और अन्य हानिकारक उत्सर्जनों में कमी के कारण जलवायु परिवर्तन में लगभग 8% तक की कमी होगी और यदि ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस कम करना है तथा उसके बुरे प्रभावों से बचना है, तो हमें प्रतिवर्ष वैश्विक उत्सर्जन में इतनी ही कमी लानी होगी।

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ये प्रभाव चाहे जिस भी कारण से आए हो पर प्रकृति ने इस बार मनुष्यों को कुछ संकेत दे दिए हैं। इन संकेतों को हमें खुद समझकर प्रकृति के संसाधनों का सोच समझकर उपयोग करना होगा । साथ ही यह भी समझना होगा कि मनुष्य यदि खुद प्रकृति का संरक्षण नहीं करेगा तो प्रकृति खुद ऐसे कदम उठाएगी। जो हो सकता है मानव के लिए बुरे हो पर प्रकृति के लिए पूर्णतया सही।

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पोस्ट एडिट की गई – Rishabh Yadav

 

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