लॉकडाउन ने बदली पर्यावरण की सूरत

वायरस (कोविड – 19) के चलते कई देशों के साथ भारत में भी लॉकडाउन किया जा चुका है। जिससे इस महामारी के बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके ।
इस लॉकडाउन के चलते आमजन के जीवन में भले ही कई तरह के प्रभाव पड़े हैं । परन्तु पर्यावरण पर इस विश्वव्यापी बंद के कई सकारात्मक प्रभाव पड़े हैं।
जैसे – कई प्रकार के जीवों का सड़कों पर देखा जाना, आमजन द्वारा शुद्ध हवा में सांस लेना , नदियों के पानी का स्वतः साफ होना।


पर्यावरण पर पड़ा है सकारात्मक प्रभाव –

Clear view during lockdown
लॉकडाउन के दौरान सड़कों पर मानवीय हलचले कम                   (फोटो- इंटरनेट) 

सूत्रों के अनुसार देशभर के बड़े शहरों में पूर्व की अपेक्षा लॉकडाउन के बाद हानिकारक सूक्ष्म कण जिसे पीएम 2.5 कहा जाता है उसकी मात्रा बहुत कम हो गयी है ।
साथ ही नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा में भी कमी आयी है जो कारखानों और फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं से बढ़ता है ।
भारत जिसमें विश्व के 30 में से 21 सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर हैं, के लिए एक बहुत ही सकारात्मक बदलाव है।
देश कि राजधानी दिल्ली में हानिकारक कण पीएम 2.5 कि मात्रा में 71 % तक कि गिरावट दर्ज की गई । साथ ही नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड कि मात्रा में भी समकक्ष गिरावट दर्ज कि गयी।
विश्व भर में प्रदूषण के गिरते स्तर से ओज़ोन परत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। फैक्ट्रीयों के बंद होने से ,वाहनों के कम चलने से ओज़ोन परत के धीरे धीरे भरने के संकेत मिले हैं । सूत्रों से अनुसार इसी प्रकार के वातावरण रहने से भविष्य में ओज़ोन परत के पूर्णतः ठीक होने के आसार हैं ।

पुकार फाउंडेशन से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-

सड़कों पर जानवरों का आगमन –

Animals walking on roads during lockdown
बन्द के बीच सड़कों पर पाए गए दुर्लभ जन्तु  (फोटो- इंटरनेट) 

जैसे ही लॉकडाउन हुआ, उसका असर आमजन के जीवन के अलावा पशु पक्षियों पर भी देखा गया । भारत ही नहीं विदेशों में भी जानवर जंगलों को छोड़ शहरों की ओर आते देखे गए हैं ।
इस प्रकार जीवों के शहरों में आने से ये अनुमान लगाना आसान है कि हम मनुष्यों ने जीव – जंतुओं के क्षेत्रों पर किस तरह अधिकार जमा लिया है।
उदाहरण के रूप में केरल में कस्तूरी बिलाव का जाना जाना, जो  कि भारत में लगभग खत्म होने की कगार पर हैं, चंडीगढ़ के बाजार में सांभर हिरण का पाया जाना , इनमें गंगटोक में हिमालयन काले भालू का पाया जाना प्रमुख है ।

नदियों और झरनों का साफ होना –

साफ हुआ जल तो लौट आए कई जीव
जल के साफ होते ही लौट कर आने लगे डॉल्फिन्स और कछुए                 (फोटो- इंटरनेट) 

देश विदेश में सभी कारखानों के बंद होने से विषैले पदार्थों का नदियों में बहना कम हो गया है । जिसके फलस्वरूप नदियों और झीलों के पानी के स्वतः साफ होते देख पा रहे हैं । इस प्रकार इन स्वतः साफ होना पर्यावरण के लिए लाभकारी है । उदाहरण के तौर पर देश कि सबसे पवित्र नदियाँ गंगा और यमुना नदी के जल का साफ होना। साथ ही विदेश में वेनिस शहर में एक दम स्वच्छ पानी का बहना।
उदाहरण के रूप में उड़ीसा के ऋषिकुल्या तट पर समुद्र से निकलने वाले ओलिव रिडले समुद्री कछुओं का मिलना , मुम्बई के मरीन ड्राइव इलाके में डॉलफिन के झुण्ड का आना । आम दिनों में ये सब इतनी आसानी से नही देखा जाता है ।

क्लिक करके जानिए पुकार के बारें में

कुछ ऐसे सवाल हैं जो हमे स्वयं से पूछने होंगे-

कोरोना वायरस के लॉकडाउन के कारण हो रहे बदलावों से ये सोचना आवश्यक हो गया है कि हम मनुष्यों को प्रकृति के साथ अपने व्यवहार को ठीक करने कि आवश्यकता है या नहीं ?
क्या हमें हर वर्ष इस तरह के लॉकडाउन की आवश्यकता है ?
क्या लॉकडाउन खत्म होने बाद पुनः वही प्रदूषण से भरपूर वातावरण देखने को मिलेगा ?

यह कुछ सवाल हैं जिनके जवाब हम मनुष्यों को खुदसे ही पूछने होंगे और समझना होगा उन जवाबों का मतलब जिनसे मानव और जीव-जन्तुओं में परस्पर तालमेल बढ़े ।

Aashish Brijwasi

5 thoughts on “लॉकडाउन ने बदली पर्यावरण की सूरत

  1. lockdown har saal hona chahiye or issw logo ko ek tyohar ki tarah manana chahiye sab apne ghar rahe sabhi factory band rahe sabhi gadiya band rahe or hamari धरती माँ ke अंचल me hum rahe or wo bi khush rahe ❤️

  2. इस बदलते वातावरण को सुधारने में पुकार का बोहोत बड़ा योगदान है। पेड़ लगाएं, पेड़ बचाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

In July, August and September of 2020, we planted 15000+ fruit trees to make our environment better. Your contribution can enable us to grow 50,000 trees more.

Our goal is to support our farmers.

Donate for trees