क्यों चमत्कारी होता है आम ?

आम है उपयोगी, आयुर्वेद में भी है वर्णन- 

पक्वं तु मधुरं वृष्यं स्निग्धं हृद्यं बलप्रदम् ।
गुरु वातहरं रुच्यं वर्ण्यं शीतमपित्तलम् ।
रसस्तस्य सरः स्निग्धो रोचनो बलवर्णकृत्

अर्थात पका हुआ आम स्वाद में मीठा, कामोद्दीपक, शरीर में जल पूर्ति करने वाला ,हृदय के लिए उपयोगी एवं बलवर्धक होता है |

आम का इतिहास – 

“आम” यह नाम जब भी सुनते हैं सभी के मुँह में एक खट्टा मीठा स्वाद आ ही जाता है | यह वही फल है जो सभी की गर्मियों को खुशनुमा बनाता है | साथ ही यह फलों का राजा भी है | इसके स्वाद और लाभकारी गुणों के कारण यह गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल है |आम का पेड़ लगभग 100 वर्षों तक जीवित रहता है |

अगर इसके इतिहास के बारे मे कहे तो ये तकरीबन 4000 सालों पुराना है | पुराने इतिहासकारों के अनुसार आम सबसे पहले भारत में ही पाया गया था | यही से फिर आम बोद्ध भिक्षुओं के द्वारा विश्व के अनेक कोनों में पहुंचा | इस फल को कई अलग अलग नामों से जानते हैं जैसे – आम्रफल , मान-काय, मांगा , मैंगो ,अमरा, चौथ, रसाला और सहकारा आदि |आम का रासायनिक नाम मेंजीफेरा इण्डिका है | विश्व भर में आम के उत्पादन का लगभग 55 प्रतिशत भारत में उत्पादित होता है |

आम के पेड़ की विभिन्न जगहों पर भिन्न-भिन्न समय पर पैदावार-

समान्यतः हम यही जानते हैं कि ये फल गर्मियों में ही आते हैं | परंतु पूरे भारत में भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में इनकी पैदावार अलग-अलग समय पर होती है | जैसे –

फरवरी से जुलाई – आंध्र प्रदेश

अप्रैल से जुलाई – गुजरात,महाराष्ट्र,तमिलनाडू

मई से अगस्त – मध्य प्रदेश,पश्चिम बंगाल, बिहार,कर्नाटक

जून से अगस्त – पंजाब, राजस्थान, हरीयाणा ,उत्तर प्रदेश

जुलाई से सितम्बर – जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश

आम की किस्में और घरेलू उपयोग

Uses of mango fruit
कच्ची कैरी

वैसे तो कई प्रकार के आम पूरे विश्व मे पाये जाते हैं पर भारत मे मुख्य रूप से 12 प्रजाति के आम होते हैं | जिनमे हाफुस,दशहरी,लंगड़ा,चौसा,बादामी,तोतपुरी,केसर आदि बहुतायत मे मिलते हैं | भारत मे लगभग प्रत्येक त्योहार एवं शुभ कार्यों में आम के पेड़ की लकड़ी एवं पत्तों का उपयोग किया जाता है | दैनिक जीवन में कच्चे आम से मुरब्बा,चटनी,आचार,पन्ना आदि बनाया जाता है |वहीं पके हुए फल को बड़े चाव से खाया जाता है साथ ही आम का जूस बनाकर पिया जाता है |

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क्यों कहलाता है आम फलों का राजा

mango fruit ayurvedic use
औषधीय गुणों से भरपूर आम

आम के फल में सामान्य तौर पर विटामिन, कार्बोहाइड्रेट,प्रोटीन, केल्शियम,फास्फोरस,पोटेशियम, सोडियम,आइरन आदि पाये जाते हैं |इतने सारे पोषक तत्वों से भरपुर होने के कारण आम फलों का राजा कहलता है |

  • पाचन में सुधार- फाइबर और पोलिफेनल्स से समृद्ध होने के कारण कब्ज़ और आंतों की सूजन कम करने के उपयोग में आता है |
  • प्रतिरक्षा बढ़ाने में सहायक – फल में विटामिन सी, फोलेट, जस्ता,विटामिन बी6 होते हैं | जो प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करते हैं |
  • आँखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक – फल के गूदे का रंग पीला होने का प्रमुख कारण केरोटिनोयड की प्रचुरता है |जो आँखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक होता है |
  • दिल के लिए – आम सेलेनियम और बी 6 का एक अच्छा स्रोत है| दोनों दिल के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
  • कैंसर बचाव – आम में एक प्राकर्तिक पोलिफेनल,मेंगीफरिन होता है जो कैंसर रोधी गुण दर्शाता है |
  • कोलेस्ट्रॉल कम- उच्च मात्र में उपस्थित विटामिन सी ,पेक्टिन एवं फाइबर कोलेस्ट्रॉल करने में सहायक होता है |
  • हीट स्ट्रोक से बचाव – इसका फल पोटेशियम का एक समृद्ध स्त्रोत है जो शरीर में सोडियम की मात्रा बनाए रखता है | सोडियम शरीर के तरल पदार्थ के स्तर को नियंत्रित रखता है और हीट स्ट्रोक से बचाता है |
  • स्मरण शक्ति तीव्र बनाने में – फल में विटामिन B-6 होता  है, जो मस्तिष्क को चुस्त-दुरुस्त और फुर्तीला बनाता है।

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आम की पत्तियों का उपयोग –

Mango leaves use
आम की पत्तियों के उपयोग
  • मधुमेह के नियंत्रण मेँ – वृक्ष के बैंगनी पत्तों में टैनिन एवं एंथोसायनिन होता है | जिनका रस शरीर में शर्करा स्तर को नियंत्रित करने में लाभदायक हो है |
  • ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाने में- वृक्ष के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट एवं विटामिन सी होता है | जो ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाता है |
  • पेट साफ करने में- वृक्ष के पत्तों के उबले हुए पानी को पीने से पेट साफ होता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकाल जाते हैं |

नुकसान भी पहुंचा सकता है फल- 

  • वजन बढ़ना –  इसमें अत्यधिक मात्रा में केलोरीज़ पाई जाती है | इसलिए इसके अत्यधिक सेवन से वजन बढ्ने की समस्या होती है |
  • ब्लड शुगर बढ़ना – इसमे प्राकर्तिक शर्करा प्रचुर मात्रा में होती है | इसलिए इसे अधिक सेवन से मधुमेह रोग का खतरा बढ़ता है |

इसीलिए हमें फल का सेवन एक निश्चित मात्रा में करना चाहिए | जिससे हमारे स्वास्थ पर सकारात्मक प्रभाव पड़े |

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Aashish Brijwasi

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