क्यों मानव जीवन के लिए आवश्यक है मधुमक्खी ?

मधुमक्खी हम मनुष्यों के लिए अतिआवश्यक जीव है| हमें उनकी व अन्य परागणक (pollinator) जीवों जैसे- तितली,चींटी,होवफ्लाय आदि की आवश्यकता है| यह हमारी खाद्य आपूर्ति को पूरा करने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं| सामान्य रूप से जो अनाज हम खाते हैं उन्हें उगाने के लिए मिट्टी,पानी और धूप ही काफी नहीं होती इसके अलावा भी एक चीज़ आवश्यक होती है – परागण| विश्व की लगभग 30% फसलें परागण पर निर्भर हैं और लगभग 90% पेड़-पौधे बढ़ने, फल और बीज उत्पन्न के लिए परागण का उपयोग करते हैं| मधुमक्खियां इस परागण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं|

क्या होता है परागण –

मधुमक्खी परागण (pollination)
परागण कि प्रक्रिया (फोटो- इन्टरनेट)

हम भोजन के रूप में जो अनाज और फल खाते हैं उन्हें उगाने के लिए परागण की आवश्यकता होती है| पेड़-पौधों को अपने परागकणों(pollen) को दूसरे पौधों तक पहुंचाने के लिए परागणकों की आवश्यकता होती है जैसे- मधुमक्खी,  तितली आदि| जब ये परागणक किसी एक फूल पर बैठतें है तो उनके पैरों और पंखों में पराग कण चिपक जाते हैं, फिर जब यह उड़कर किसी दूसरे पौधे पर बैठते है तब यह परागकण उस पौधे में चले जाते हैं जिससे पौधों में निषेचन कि प्रक्रिया शुरू होती है तथा फल और बीजों की उत्पत्ति होती है|

आखिर क्यों आवश्यक है मधुमक्खी –

मधुमक्खी (honey bee)
मधुमक्खी (फोटो – इन्टरनेट)

मधुमक्खियां परागण के लिए पूर्णतया अनुकूलित होती हैं| वे पौधों को बढ़ने, प्रजनन और भोजन का उत्पादन करने में सहायता करती हैं| वे पौधों के फूलों के बीच परागकणों को स्थानांतरित कर जीवन चक्र को बनाये रखती है जिससे हमें जीवन यापन के लिए आवश्यक भोजन की पूर्ति होती है| वे उच्च गुणवत्ता वाले शहद के साथ ही स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यक वस्तुएं प्रदान करती हैं जिनका उपयोग हम हजारों वर्षों से कर रहे हैं| भारत में मधुमक्खी पालन, कृषि का एक अति महत्वपूर्ण अंग है| आर्थिक दृष्टि से भी इसका काफी महत्त्व है| हम ही नहीं अपितु कई तरह पक्षी और कीट भी मधुमक्खी के शहद से भोजन प्राप्त करते हैं| एक शोध के अनुसार पक्षियों की 24 प्रजातियां ऐसी है जो पूर्णतः मधुमक्खियों पर निर्भर है|

कई बीमारियों के लिए लाभकारी है शहद –

मधु (honey)
शहद का उपयोग (फोटो इन्टरनेट)

यह एक ऐसी एंटीबायोटि‍क औषधि है, जो पूर्णत: प्राकृतिक होती है|
इसमें वसा को छोड़कर अन्य पोषक तत्व जैसे एंजाइम,मिनरल,विटामिन आदि होते हैं| शहद त्वचा, बाल, हार्ट अटैक, उच्च रक्तचाप, सर्दी जुकाम, खून की कमी, वजन घटाना, अस्थमा आदि में उपयोगी है| सर्दियों में शहद नवजात के लिए अमृत का काम करता है|

पर्यावरण संतुलन के लिए मधुमक्खी का योगदान –

मधुमक्खी (bee)
परागण के लिए आवश्यक मधुमक्खी (फोटो-इन्टरनेट)

प्रकृति में पारिस्थितिकी तंत्र संतुलन और जैव विविधता के संरक्षण के लिए मधुमक्खियां महत्वपूर्ण हैं| वे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अति महत्वपूर्ण कार्य करती हैं -“परागण”| जो कि खाद्य उत्पादन को संभव बनाता है| ऐसा करने से वे पारिस्थितिक तंत्र के साथ-साथ पशु और पौधों की प्रजातियों की रक्षा करती हैं| इसके साथ ही वे आनुवांशिक और जैविक विविधता में योगदान देती हैं|
मधुमक्खियां पर्यावरण स्थिति के संकेतक के रूप में भी कार्य करती हैं| उनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति कि मात्रा हमें बताती है कि पर्यावरण में बदलाव हो रहा है। मधुमक्खियों के विकास और स्वास्थ्य को देखते हुए पर्यावरण में परिवर्तन का पता लगाना संभव है| जिससे हम समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए उचित उपाय कर सकते हैं|

परागणकों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, उनके सामने आने वाले खतरे और विकास में उनके योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस के रूप में नामित किया है|

जानिए क्यों बेहतर पर्यावरण के लिए आवश्यक है पैतृक प्रजाति के पौधे ?

भारत में उपस्थित प्रजातियाँ –

मधुमक्खी का वैज्ञानिक नाम एपिस होता है। भारत में मधुमक्खी की चार प्रजातियाँ पाई जाती है|

1. छोटी मधुमक्खी (एपिस फ्लोरिय)
2. भैंरो या पहाड़ी मधुमक्खी ( एपिस डोरसाटा)
3. देशी मधुमक्खी (एपिस सिराना इंडिका)
4. इटैलियन या यूरोपियन मधुमक्खी (एपिस मेलिफेरा)।

कुछ रोचक तथ्य मधुमक्खी के बारे में –

1. वैज्ञानिक शोध के अनुसार पूरे विश्व में मधुमक्खियों की 20000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती है| परन्तु इनमें से केवल 4 प्रजाति ही शहद बना सकती है|

2. एक छत्ते में लगभग 20 से 60 हजार मादा मधुमक्खियाँ, कुछ सौ नर मधुमक्खियाँ और 1 रानी मधुमक्खी होती है| इनका छत्ता मोम से बना होता है जो इनके पेट की ग्रंथियों से निकलता है|

3. शहद हजारों साल तक खराब नही होता है| शहद में ‘फ्रक़टॉस’ की मात्रा अधिक होने के कारण यह चीनी से 25% अधिक मीठा होता है|

4. इनके शहद में मनुष्य के लिए आवश्यक 84 पोषक तत्वों में से 83 तत्व उपस्थित होते हैं|

वर्तमान में मधुमक्खियों का जीवन मुश्किल में है| दुनिया भर में इनकी कमी पर सार्वजनिक और राजनीतिक चिंता प्रकट की जा रही है। इस कमी का कारण, उनके पैतृक निवास स्थान और खाद्य स्रोतों के नुकसान से लेकर कीटनाशकों के संपर्क में आने और जलवायु परिवर्तन आदि हैं|

इनकी लगातार कमी होने का सीधा प्रभाव पर्यावरण और मानव जीवन पर पड रहा है| जिसका कारण कही ना कही हम मनुष्य ही हैं, समय रहते हमें इनके महत्व को समझकर उचित कदम उठाने होंगे और इसकी शुरुआत हमें करनी होगी उनके लिए उचित पर्यावरण बनाकर| जिसके लिए हमें पैतृक प्रजातियों का रोपण कर उनका संरक्षण करना चाहिए| जिससे मधुमक्खियों को उचित घर और भोजन मिले|

__________________________________________________________________________

पुकार से जुड़ने के लिए 7229988335 पर कॉल करें या पुकार वेबसाइट पर सम्पर्क कर सकते है। आप पुकार के सोशल मीडिया फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम से भी जुड़ सकते है |

नोट– यह ब्लॉग पूर्णतयाः जागरूकता हेतु बनाया गया है अतः अगर किसी लेखन, फ़ोटो आदि पर कोई आपत्ति हो तो, हमसे संपर्क करें।

 एडिट किया गया – ऋषभ यादव

Aashish Brijwasi

One thought on “क्यों मानव जीवन के लिए आवश्यक है मधुमक्खी ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

In 2019, we planted 10000+ trees to make our environment better. Your contribution can enable us to grow 50,000 trees more.

Our goal is to support our farmers

Donate for trees

Donate now