क्यों आवश्यक है जैव-विविधता ?

 ”जैव-विविधता का साधारण अर्थ पृथ्वी पर जीव जंतुओं में पाई जाने वाली विभिन्नता से है|”

हमारे जीवन में जैव-विविधता का काफी महत्व है| धरती पर अनेक जीव हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसार विकसित हुए हैं| इन सभी जीवों में अलग-अलग व्यवहार और गुण होते हैं, इनमे पाई जाने वाली भिन्नता ही जैव-विविधता का आधार है| सभी जीवों का जीवन चक्र पर्यावरण पर निर्भर करता है, जैसे ही पर्यावरण इनके विपरीत होता है इन पर प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है| इसी कारण से वर्तमान में जीव-जंतुओं एवं पादपों की कई प्रजातियाँ या तो विलुप्त हो गयी या विलुप्ति की कगार पर हैं|

क्या होती है जैव-विविधता –

जैव-विविधता (biodiversity)
जैव विविधता (फोटो – इन्टरनेट )

धरती पर पाए जाने वाले जीवों में विभिन्नता या विशेषता ही जैव-विविधता कहलाती है| सामान्य भाषा में कहे तो अलग-अलग स्थानों पर जीवों का रहन-सहन खान-पान भिन्न होता है| उनकी इसी भिन्नता को हम जैव-विविधता समझ सकते हैं| धरती पर करोड़ों वर्ष पहले जीवन की उत्पत्ति हुई थी| वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर वनस्पतियों की लगभग 300000 प्रजातियाँ उपस्थित हैं जिनका धरती पर संतुलन बनाये रखने के लिए विविधता आवश्यक है|

इसे मुख्यतः 3 भागों में बांटा गया है –

1. आनुवंशिक
2. प्रजातीय
3.पारिस्थितिकीय

जैव विविधता दिवस –

पर्यावरण एवं प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में जैव-विविधता का महत्व देखते हुए ही 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है| इसका प्रारंभ संयुक्त राष्ट्र संघ ने किया था, नैरोबी में 29 दिसंबर 1992 को हुए जैव-विविधता सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था|

जीवन की प्रकृति पर निर्भरता –

जैव-विविधता ही समाधान (nature is solution)
प्रकृति पर जीवन की निर्भरता (फोटो – इन्टरनेट)

“प्रकृति में ही हमारी सभी समस्याओं के समाधान निहित है|”

इस कथन को समझकर हमें प्रकृति के संरक्षण के लिए कदम उठाने होंगे अन्यथा भविष्य में हालात और भी बुरे हो सकते हैं| प्रकृति के खिलवाड़ के परिणाम को हम देख ही रहे हैं| वर्तमान में पर्यावरण में हुए बदलाव जग-ज़ाहिर हैं| उससे सीख लेकर हमें जैव-विविधता के महत्व को समझना होगा एवं निरंतर उसके संतुलन के लिए प्रयास करने होंगे |

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जैव-विविधता की स्थिति भारत में –

भारत जैविक विविधता से समृद्ध देशों में से है| यह Indomalaya Ecozone में स्थित है| दुनिया में 35 जैव-विविधता हॉटस्पॉट स्थानों में से 2 भारत में है|

भारत में –

-350 स्तनधारी प्रजातियाँ हैं जो विश्व प्रजातियों का लगभग 7.6% है|
-1224 पक्षियों की प्रजातियाँ हैं जो दुनिया की प्रजातियों का 2.6% हिस्सा है|
-197 उभयचर प्रजातियाँ हैं जो दुनिया की प्रजातियों का लगभग 4.4% है|
-408 सरीसृप प्रजातियाँ हैं जो दुनिया की प्रजातियों का लगभग 6.2% है|
-2546 मछलियों की प्रजातियाँ हैं जो दुनिया की प्रजातियों का 11.7% हिस्सा है|
-15000 फूल वाले पौधों की प्रजातियाँ हैं जो दुनिया की प्रजातियों का लगभग 6% है|

जैव-विविधता से होने होने वाले लाभ –

1. वन्यजीव स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र बनाये रखने में उपयोगी होते हैं|
2. जैव-विविधता वाले पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने से मनुष्य को स्वस्थ रहने में सहायता मिलती है|
3. जलवायु परिवर्तन के समाधान के लिए यह एक अतिआवश्यक अंग है|
4. अच्छी अर्थव्यवस्था के लिए जैव विविधता लाभदायक होती है|
5. यह संस्कृति और पहचान का एक अभिन्न अंग है|

जैव विविधता को हानि पहुंचाने वाले कारक –

जैव-विविधता को हानि (deforestation)
जैव विविधता को हानि (फोटो – इन्टरनेट)

1. बढ़ती जनसंख्या एवं औद्योगिकरण –  धरती के प्राकृतिक संसाधनों को हानि पहुंचने का सबसे बड़ा कारण है जनसंख्या वृद्धि| जनसख्या में निरंतर वृद्धि के कारण संसाधनों की कमी होती जा रही है, साथ ही इतने विशाल स्तर पर खाद्य एवं अन्य साधनों की पूर्ति के लिए बड़े उद्योग लगाए जा रहे हैं| जिसके कारण कई सारे बड़े प्राकृतिक जंगलों को नष्ट किया जा रहा है|

2. जलवायु परिवर्तन – रोज़ाना अधिक से अधिक लोग जलवायु परिवर्तन करने वाले उत्पादों का उत्सर्जन करते हैं। हमारा ग्रह कार्बन डाइऑक्साइड और मिथेन सहित ग्रीनहाउस गैसों के अंतहीन उत्पादन के कारण जलवायु संकट की कगार पर है| यदि जलवायु परिवर्तन को नही रोका गया तो आने वाले समाय में पृथ्वी का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जायेगा| यह आंकड़ा हमरे लिए हानिकारक है|

3. प्रदूषण वर्तमान समय में सबसे बड़ा खतरा प्रदुषण ही है, चाहे वो जल, वायु या ध्वनि किसी भी प्रकार का हो। समुद्रों में अनेक प्रकार के रासायनिक मिश्रणों से जलीय वनस्पति और जीवों को क्षति हो रही है| वायु प्रदुषण से कई जीव श्‍वास सम्बन्धी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं वनस्पति नष्ट हो रही है| यह सभी जैव-विविधता के लिए आघात हैं जिनका परिणाम घातक है|

वर्तमान समय में हम जो नुकसान झेल रहे हैं वह जैव-विविधता में हो रहे असंतुलन के कारण हैं| इन्ही कारणों से हम वर्तमान में कोविड-19 जैसी घातक बीमारियो से जूझ रहे हैं| इनका संरक्षण और संवर्धन हमारा परम लक्ष्य होना चाहिए अन्यथा परिणाम और भी घातक होंगे|
तो आइये इस अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर आप और हम मिलकर पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने का संकल्प करें और बेहतर भविष्य बनाने में अपना योगदान दे|

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नोट– यह ब्लॉग पूर्णतयाः जागरूकता हेतु बनाया गया है अतः अगर किसी लेखन, फ़ोटो आदि पर कोई आपत्ति हो तो, हमसे संपर्क करें|

एडिट किया गया – ऋषभ यादव

Aashish Brijwasi

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